चन्द्रकलाक घरआपसीक कथा फ़िल्मी छै!

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क्रिसमसक भोर. निन्न फुजले छल कि मोबाइल गाबि उठल. साल्टलेक थाना सं कॉल छल -‘आसुन, आपनार लोक एसेछे बिहार थेके’. हमरा आश्चर्य भेल छल आ हर्ख सेहो. थाना-पुलिसक चक्कर सं कने भयो लागल छल. मुदा बीतल किछु दिन मे कएल काज पर हिम्मति छल. भास्करजी कें फोन मिलओलहुं त’ ओ देवघर मे रहबाक बात कहलनि. मुदा आश्वस्त केलनि जे ‘चन्द्रकला’क परिजन कें रिसीव करबाक लेल ओमप्रकाश पहुंचि जेताह आ सभ काज भ’ जेतैक. कनेक काल पर पुलिसक फोन अबैत रहल आ ओ डपटैत रहल. मुदा किछु कॉलक बाद फोन आएब बन्न भ’ गेल. मने ओमप्रकाश पहुंचि गेल रहथि चन्द्रकलाक पति लग.

क्रिसमस सं लगभग एक मास पहिने भास्करजी महानगरक साल्टलेक क्षेत्र मे एक मैथिलीभाषी बूढ़ महिलाक रहबाक बात कहलनि जे लगभग पनरह बरख सं सड़कक कात मे गुजारा करैत रहल छल. एमकी जाड़ काटब ओकरा लेल चुनौतीपूर्ण भ’ गेल छलैक. लगक दोकानबला सभ ओकर खियाल करैत छलैक आ सभ ओकरा ओकर गाम पठयबाक बात करैत छलैक. बेर-बेर पुछने बुढ़िया गामक नाम बेतौना (बेनीपट्टी) कहैत छलैक. ओ कोना-किए एतय आबि गेल छल से स्पष्ट नै भ’ सकल छल.

हम कने कछमछा क’ एहि विषय कें बिसरा जेना देलियैक. मने ‘मन्डे टू फ्राइडे’ केर व्यस्तता मे ओझरा गेलहुं. पुनः भास्करजी केर फोन आएल. जाड़ बढ़ल जा रहल छल आ बुढ़िया खाना-पीना कम क’ देने छल. बीड़ीक इलम बेस छलैक ओकरा आ से जखन-तखन धूकैत रहैत छल. मुदा खाल (धार) कातक शीतलहरी बीड़ी धुआं पर काटब संभव नै.

दू बेर जा क’ बुढिया सं गप्प केलहुं आ ओकरा विषय मे किछु डिटेल एकत्र केलहुं. गाम पर बड़का भैया (सरपंच त्योंथ) कें विषयक जानकारी देलियनि. संयोग जे त्योंथ सरपंच वशिष्ट कुमार झा संरपंच संघक कोषाध्यक्ष छथि आ हुनका लग सभ पंचायतक सरपंचक संपर्क सूत्र उपलब्ध छलनि. ओ बेतौनाक सरपंच शौकत अली नूरी केर सूत्र देलनि. शौकत साहब सं जखन संपर्क केलहुं त’ ओ पूरा सहयोग केर भरोस देलनि. तीन-चारि बेर गप्प भेलाक बाद आ कनेक छानबीनक बाद शौकत बाबू चन्द्रकलाक घरक पता लगा लेलनि. चन्द्रकला कछड़ा बस्तीक विलास पासवान (70 वर्ष) केर पत्नी छल जे पनरह बरख पूर्व घर सं निकलि गेल छल.

आब हमरा बुढ़ियाक पोता सं फोन पर गप्प होमए लागल छल. ओ हमरा सं अपन पितामहीक सम्बन्ध मे निजगुती चाहि रहल छल. नाना प्रश्न, नाना संधान करब शुरू केलक. हमरा ई सभ असहज लागि रहल छल. हम ओकरा डपटैत कहलियैक जे अहांक पितामहीक सुधि देलहुं से अपराध भेल. लेबए एबैक त’ नीक, नै त’ जेना-तेना जीबिये रहल छै बुढ़िया.

एम्हर भास्करजी कें एहि संबंध मे अपडेट देइत रहल छलहुं आ ओ स्थानीय नीक लोक ओमप्रकाशजी कें अपडेट देने जा रहल छलाह. ओमप्रकाशजी समाजसेवी छथि आ पिछड़ल सभक मदति लेल समर्पित रहैत छथि. यएह बुढियाक विषय मे भास्करजी कें बतओने छलाह आ तखने ओ एहि विषय मे पड़ल छलाह. ओमप्रकाशजी थाना -पुलिसक कागजी विधान क’ बुढ़िया कें ओकर पति संग विदा क’ देलनि.

जानकारी भेटल जे पनरह साल पहिने चन्द्रकलाक एकटा पुत्रक असामयिक निधन भ’ गेलैक आ ओ विक्षिप्त जकां भ’ गेल. एहने मे ओ गाम सं विदा भ’ गेल छल. कोना-कोना ई कलकत्ता आएल आ कोना पनरह बरख रहल से एखनो एक बुझौअलि अछि. मुदा ओ पति कें देखिते माथ पर नुआ ध’ नेने छल आ प्रसन्न भेल छल. एतबे नै दोकानबला सभक पत्नी सभ चन्द्रकला कें माएतुल्य बुझैत छल आ कपड़ा-लत्ता, इदाइ-विदाइ संग विदा केलक.

आपसी कम्यूनिकेशन सं नरक सन जिनगी जीबैत चन्द्रकला अपन गाम अपन लोकक मध्य पहुंचि गेल. एहन कतेको चन्द्रकला महानगरक चकचोन्हीं मे नारकीय जिनगी बिता रहल होएत. सैकड़ो सामाजिक संस्था बड़का-बड़का बात करैत चंदा उगाही करबा मे लागल होएत मुदा केओ चन्द्रकला सन-सन नचार लोकक सुधि लेबा मे रुचि नै देखबैत अछि. ओमप्रकाशजी सनक एक-एकटा व्यक्ति बड़का-बड़का काज करैत देखल जाइत छथि त’ मानवता जीबैत अछि से निजगुती होइछ. मामिला मे सरपंच द्वय वशिष्ट कुमार झा, शौकत अली नूरी आ साहित्यिक मित्र भास्करजी केर तत्परता आ सहयोग प्रशंसनीय अछि.

साभार: मिथिमीडिया

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मिथिला-बांग्ला संबंधक मूक गवाह ‘विद्यापति सेतु’

 

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कल्लोलिनी कलकत्ता. ई महानगर देशक सांस्कृतिक राजधानीक दर्ज़ा पओने अछि. एहि ठाम केर धरती अनेको संस्कृतिक अनुपम संगम कें अपन वक्ष पर बिहुंसति रखने अछि. मिथिला, मैथिली ओ मैथिलक कलकत्ता कनेक्शन त’ अओरो पुरातन ओ अभिन्न अछि. बांग्ला ओ मिथिला केर संस्कृति एक्कहि गाछक दू डारि अछि. पहिनहि सं बांग्ला केर राजधानी कलकत्ता मे मैथिल मानुष अपन संस्कृतिक मूल तकैत आबि रहल छथि. कहल जाइत छैक जे महानगर ओ उपनगरीय क्षेत्र मे लगभग दस लाख मैथिल डेरा जमओने छथि आ अपन शिक्षा, रोजगार आदि मे लागल छथि. एहि ठामक लगभग अढ़ाइ दर्जन मैथिल संस्था, एकटा मैथिली दैनिक, आध दर्जन मैथिली सामयिक पत्रिका, अनेको स्मारिका, वार्षिक अनुष्ठान, साहित्यिक गोष्ठी आदि एहि बातक पुष्टि करैत अछि जे कलकत्ता मैथिल हेतु दोसर मिथिला अछि. ओना एहि महानगर कें मैथिलक तीर्थस्थली कहल जाइत अछि जे एकदम सटीक अछि.

एकदिस एहिठाम दड़िभंगा महाराजक अनेको निशानी मैथिलक इतिहास पर एखनो ओहिना टॉर्च बाडैत अछि त’ दोसर दिस मैथिल संस्थादि द्वारा बनाओल स्मारक मिथिला-बांग्ला संबंधक मूक गवाही देइत अछि. कलकत्ता मे मैथिलक एहने चेन्हासी अछि ‘विद्यापति सेतु’, जे सियालदह टीसन पर जयबाक मार्ग अछि.

सियालदह रेलवे टीसन केर खचाखच भीड़ आ यातायात केर समस्याक समाधान हेतु एहि फ्लाइओवर केर निर्माण कयल गेल अछि. ई फ्लाइओवर अपना नीचां विशाल बजार कें सेहो पोषित कयने अछि. संगहि सियालदह टीसन पर अबिते लोक एहि सेतुक दर्शन करैत अछि. विद्यापतिक नाओ भेटने ई फ्लाइओवर मैथिल- बंगाली जनास्था केर केंद्र सेहो बनि गेल अछि. ई सेतु बंग प्रान्तक राजधानी कोलकाता ओ मिथिला केर कथित राजधानी दरिभंगा (द्वार-बंगा:बंग केर द्वार) केर मध्य चिर संपर्कक गवाही देइत अछि.

सियालदह फ्लाइओवर केर उद्घाटन १७ दिसंबर, १९८९ कें कलकत्ता नगर निगमक तत्कालीन मेयर कमल कुमार बसु कयलनि. एकर नामकरण मे कलकत्ता केर प्रबुद्ध मैथिल लोकनिक भूमिका अत्यंत सराहनीय अछि. ई साकांक्ष मैथिल लोकनिक सत्प्रयास थिक. एहि सेतु पर विद्यापतिक प्रतिमा विद्यापति स्मारक मंच द्वारा स्थापित कयल गेल अछि. जकर अनावरण १२ नवम्बर, २००० कें कोलकाता नगर निगम केर तत्कालीन मेयर सुब्रत मुखोपाध्याय कयलनि.

विद्यापति अवसान दिवस पर प्रत्येक वर्ष कोलकाता केर अनेको संस्था सभ मिलि विशाल जुलूस निकालैत अछि जे विद्यापति विद्या मंदिर सं शुरू भ’ विद्यापति सेतु धरि जा विशाल सभा मे परिवर्तित भ’ जाइत अछि. जुलूस कोलकाता केर मुख्य मार्ग सं निकलैत अछि जाहि मे विद्यापति संगीत आ झाकी एकरा अओर बेसी उत्कृष्ट बना देइत अछि. कोलकाता मे मैथिल उपस्थितिक अनुपम क्षण रहैत अछि ओ. ई पूरा कार्यक्रम विद्यापति स्मारक मंच केर अगुआइ मे होइत अछि. कार्यक्रम मे आमंत्रित मैथिल-बंगाली प्रबुद्ध लोकनि विद्यापति आ मिथिला-मैथिली पर अपन विचार रखैत छथि. एम्हर आबि क’ संपर्क (साहित्यिक गोष्ठी) केर मासिक बैसार आ काव्य गोष्ठी (ओहि मासक) सेहो विद्यापतिक सोझा मे होइत अछि. एहि कार्यक्रमक हलचल स्थानीय मीडिया मे सेहो पसरल रहैत अछि.

विद्यापतिक प्रतिमा हेतु सेतु पर पर्याप्त स्थान देल गेल अछि. मुदा प्रतिमा कें छोडि ओतय किछुओ एहन नहि अछि जे ओहि स्थान कें रमणीय बना सकत. कार्यक्रमक पश्चात ओतय साल भरि विद्यापतिक प्रतिमा आबय-जाय वला लोक कें टुकुर-टुकुर तकैत अछि. मुदा लोकक नज़रि ओहि प्रतिमा पर शाइते जाइत होयत. ओहि स्थल केर सौन्दर्यीकरण कें ल’ प्रशासन संगहि मैथिल सेहो उदासीन बुझना जाइत अछि.

एम्हर आबि क’ एक खबरि अखबारक सुर्खी बनल छल जे सेतु पर जे विद्यापतिक प्रतिमा कें स्थानांतरित कयल जायत. एहि विषय मे प्रशासन ओतय ट्राफिक पुलिस पोस्ट बनयबाक बात कहने छल. कारण विद्यापति कें समर्पित ओ स्थान सेतुक महत्वपूर्ण बिंदु अर्थात चौराहा पर अछि. एहि खबरिक तेहन ने असरि भेल जे विद्यापति स्मारक मंच आ स्थानीय साकांक्ष मैथिल लोकनि प्रतिमा स्थल पर जुटि धरना आ नाराबाजी कयलनि संगहि प्रशासन कें मैथिल जनमानस केर आस्था कें आघात पहुंचत कहल गेल. एहि मामिला मे स्थानीय मीडिया केर भरपूर समर्थन भेटल आ प्रतिमा यथास्थान रहल. एहि अवसर पर एहि स्थान केर सौन्दर्यीकरण हेतु सेहो स्वर बुलंद भेल छल मुदा आइयो ओ स्थान ओहिना अछि आ विद्यापतिक प्रतिमा सेहो ओहिना टुकुर-टुकुर तकैत अछि.

कलकत्ता मे मिथिला, मैथिली ओ मैथिल केर चेन्हासी बहुतो अछि, ओहि मे विद्यापति सेतु केर अपन विशिष्ट स्थान छैक. आवश्यकता अछि एकरा प्रति आम मैथिलक जागरूकताक. एकर संरक्षणक प्रति साकांक्ष होयब मैथिलक प्रथम दायित्वा बनैत अछि. कोनो वस्तु जुटायब आ फेर ओकरा जोगायब मैथिल नीक सं जनैत अछि. हमरा सभ जुटा त’ लेनहुं आब जोगायब जरूरी.

साभार: मिथिमीडिया

साकांक्ष होउ, अधिकार भेटत

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मैथिली उपेक्षित अछि…मिथिलाक लोक सेरायल रक्तक अछि…मैथिल अपने मे लड़ि-कटि जायत. ई सभ एहन बात अछि जे बाहरक लोक अपना सभक विषय मे सोचैत अछि. एक बेर अपने सभ सोचबै त’ ई बात सभ सत्त लागत.

असल मे जखन कोनो डेग बढ़यबाक रहैत अछि त’ मिथिलाक लोक चूरा दही खयबा मे आ गोसाओनिक घर मे गोर लगबा मे लागि जाइत अछि आ तावत दरबज्जाक आगां सं बस निकलि जाइत छैक. फेर नियार होमय लगैत छैक जे की करू? जतरा क’ लेने छी आ आब अंगना कोना जायब? आ जओं अंगना जाइत छी आ जात्रा पर नहि निकलब त’ फेर काल्हि सं भदबा पड़तैक आ आठ दिन बादे फेर जतरा करब संभव होयत.

अउ महराज…आबहु चेतू. एकैसम शताब्दिक दोसर दशक बीति रहल छैक. महराजी गेलैक किदन लेबय…जागू आ भागू. अहांक देश दूगो आन बैसि बांटि लेलक…अहाँ लेल धनि…केदन-कहांदन लूटि-कूटि खेलक तइयो धनि. अहांक निनिया केर कारणें अहांक कें केओ आओर अरिया लेलक तइयो कोनो फिकिर नहि. आब अहांक भाखा, संस्कृति, सभ्यता अपन मौलिकता गमओलक आ अस्तित्व लेल झखइए…आबहु जओं सुतले रहब त’ निन्न टुटबहु करत त’ फेर अपन पएर पर ठाढ़ होयबा योग्य शक्ति नहि बचत.

आब रसे-रसे मूल मुद्दा दिस बढब. मिथिला मे कहियो आवाज नहि उठलैक…! ने जन अधिकार लेल, ने शिक्षा लेल, ने भाखा लेल, ने आन सामाजिक विषय-वस्तु लेल. जओं किछु चाल-चूल अभरितो अछि त’ से बाहर सं जन आन्दोलन वा जनजागरण बुझना जायवला जनजुटाओ दियादी झगडा कें चपेट मे पडि सेरा जाइत रहल अछि. हं…एतय भाखा कें ल’ आन्दोलन भेलैक आ सफल रहलैक. भाषा-अधिकार लोक कें भेटलैक. आब बिहार मे सरकारी उदासीनता भाखा कें पोलियो दंश देबय लेल पर्याप्त सिद्ध भ’ रहल अछि. से मैथिल लोकनि कें साकांक्ष रहब आवश्यक. गणतंत्र छैक आ मांग आ मनौवलि श्रृंखलाबद्ध रूपें चलयबाक खगता छैक. मैथिल अपना कें अयाचि केर संतान कहैत छथि आ लगइए तें मांगब मे पाछू रहि जाइत छथि. मैथिल केर ई भावना भाखा-संस्कृति लेल खतरा सन बनल अछि.

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एकटा आओर भावना जाहि सं मैथिल युवा ग्रसित छथि जे मैथिली माने पुरना सोच, पुरना लोक. भाषा-संस्कृति-जाति-धर्म केर बात करब अपराध जका छैक. तुरत लोक टोकत आ कहत जे ई आधुनिक सोच नहि भेल. एम्हर एहि सोच मे द्रुत गतिये परिवर्तन देखल गेल अछि. मैथिल युवा अपन भाषा-संस्कृति आ अधिकारक प्रति साकांक्ष भ’ रहल छथि. ई मिथिला लेल सकारात्मक संकेत अछि.

मिथिलाक लोकाधिकार लेल आवाज उठयबाक साधन अर्थात मीडिया सेहो नगण्य अछि. एकर तेजी सं विकास भ’ रहल अछि. भूमिका बन्हैत-बन्हैत थाकि जाइ ओहि सं पहिने अपन मूल मुद्दा पर आबिये जाइत छी.

नव दिल्ली मे एहि बेरक अर्थात 2013 केर गणतंत्र दिवस पर बिहारक झांकी मे मिथिलाक पथिया-मौनी कला देखाओल गेल. ओहि संग मैथिली लोकगीत बजैत छल जे उपस्थित दर्शक लोकनिक बेस ध्यान आकर्षित कयलक. पटना गांधी मैदान मे मंजुषा/पौती कला सहित मिथिला कला केर दू गोट झांकी प्रस्तुत कयल गेल.

पछिला बेर माने 2012 केर नव दिल्लीक बिहार केर झांकी मिथिलाक व्यवहार कें दर्शओबैत छल. विषय छल, भागलपुर जिला आदर्श ग्राम “धरहरा” जतय बेटी जन्म पर खुशी मनाओल जाइत छैक. संगहि ओकर नाम स’ कम स’ कम दस टा गाछ सेहो लगाओल जाइत छैक. ओहि झांकी संग गीत भोजपुरी मे छल.

एहि बात कें हम सोशल साइट सहित अपन ब्लॉग केर माध्यम सं उठओलने छलहुं. कहब छल जे मिथिला केर संस्कृति केर झांकी मे मैथिली गीत रहबाक चाही. पोस्ट बहुत बेसी चर्चा बटोरने छल. हमर ओहि बात कें बहुतो बिहारी मैथिल उदारवादी होइत नकारलनि आ बहुतो बेकार केर बात कहलनि. बहुतो कें एहि सं बिहार केर शानक विरुद्ध बात लगलनि. तथापि अनेक मैथिल बुद्धिजीवी लोकनिक नैतिक समर्थन भेटल.

ओहि समय मैथिली मुद्दा आ मिथिलाक हितैषी केर दावा कयनिहार समाद माध्यम सभ एहि मुद्दा पर कान-बात देब उचित नहि बुझलक. एहि बेर जखन नव दिल्लीक राजपथ पर मिथिलाक कला कें समेटने बिहार केर झांकी निकलल त’ मैथिली लोकगीत बाजल आ समूचा माहौल मैथिलीमय भ’ गेल.

ई आलेख कोनो क्रेडिट लुझबाक लेल नहि अपितु अप्पन लोक लग अप्पन बात पहुंचयबाक लेल अछि. जओ बजबइ नहि त’ सुनत के? संविधान अहांक कें अपन अधिकारक जखन गारंटी देइत अछि त’ अपन मत प्रकट करबाक अवसर सेहो देइत छैक. मात्र आवश्यकता छैक साकांक्ष होयबाक. अहां कें अहांक अधिकार सं केओ वंचित नहि क’ सकैत अछि.

साभार: मिथिमीडिया

मउलाएल चेतनाक हरियाएल पक्ष

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माय, मातृभूमि आ मातृभाखाक प्रति मैथिलक चेतना मउलाएल अछि कहैत कनियो ठोर नहि कंपैत अछि. एकैसम शताब्दीक दोसर दशक मे आबि चेतनाक बात करब ओहुना बइमानी सन लगैत अछि. एखन समूचा ग्लोब एक गामक रूप ल’ नेने छैक. ग्लोबल होयबाक चक्कर मे चेतना चौपट भेल जा रहल छैक. जुग जे हो मुदा माय, मातृभूमि आ मातृभाखाक महत्ता रहबे करतैक. चेतना शून्य भेने ‘महत्ता’ कोन खत्ता मे जा खसतै से हथोरियाबय मे सेहो कएक जुग लागि जेतैक. बेसी विलम्ब भेने कप्पार पिटने किछु लाभ नहि होयत. चेतबाक समय आबि गेल छैक आ चेतना कें हरिअयबाक बेर सेहो.

अभिभावक केर सूगा-नूनू, शिक्षकक मेरे को-तेरे को आ बजारक दिस-दैट बुझि गेल पीढ़ी मे अपन भाखा, क्षेत्र आ समाजक प्रति कर्त्तव्यबोध छैक. मुदा एखन जन्महि सं जे बजारक दिस-दैट सिखयबाक ट्रेंड चलल अछि, ताहि सं आगां चलि क’ मायक मान, मातृभूमिक सम्मान आ मातृभाखाक आन सभ धुसरित होयत. जिज्ञासा आ नव आशाक संग किछु युवा मैथिल सं बात केनहुं त’ जतबे संतोष भेल ततबे अफ़सोस.

महानगरीय जिनगी मे नीक जकां एडजस्ट क’ चुकल मुकेश केर कहब छैक, ‘मिथिला/मैथिली सं हमरा की? हमरा केओ कहबो ने कयलक जे हमर मातृभाषा मैथिली अछि. ओ त’ जेना -जेना ज्ञान भेल, ज्ञात भेल जे मैथिली हमर मातृभाषा अछि. मैथिली मातृभाषा रहितहुं, हम अपना कें हिंदी भाषी बुझैत छलहुं. ओहुना हमरा एहि सं कोनो माने मतलब नहि अछि. हं…कतहु मैथिली-मिथिला केर जिक्र होइत छैक त’ कने आकर्षित होइत छी.’

एहिना एक आओर युवक रजनीश केर कहब छैक, ‘मैथिली गाम-घरक भाषा छैक. हम बेसी काल मधुबनी मे रहैत छी. हमरा घर मे सभ हिंदी बजैए. हं…घरक बाहर फेर मित्र सभ सं मैथिली मे बात करैत छी.’

कक्षा नवम केर छात्र किशोरक बात सुनि स्तब्ध भ’ गेलहुं. ओ कहलक जे ओकरा संगे नन्हियेटा सं घरक लोक हिंदी मे बात करैत छैक. मुदा ओकरा मैथिली बजैत नीक लगै छैक आ ओ घर मे त’ नहि मुदा अवसर भेटने मैथिली बाजय सं परहेज नहि करैत अछि.

रजनीक अनुसार महानगर मे रहितो ओ स्वाभाविक रूपें मैथिली बजैत अछि. आवश्यकते भेने आन भाषाक प्रयोग करैत अछि. मिथिला केर संस्कारे ओकरा अपन जडि सं जुडल रहबा मे सहायक होइत छैक.

उपर किछु युवा मैथिल केर बात उद्धृत अछि, जाहि सं स्पष्ट अछि जे मैथिल चेतनाक पल्लवन आ ह्रास दुनू घरे सं होइत छैक.

एहू बात केर संकेत भेटल अछि जे कतहु ने कतहु मोन मे मैथिल चेतना बैसल रहैछ जे सुसुप्तावस्था मे जमकल रहैत अछि. कोनो संस्कृति केर संवाहक भाषा होइत छैक. भाषाक संरक्षण सं सांस्कृतिक संरक्षणक गारंटी भेटैत छैक. एहन बात नहि छैक जे चेतना केर क्षरण मात्र मिथिले मे भ’ रहल छैक. मुदा एतेक निश्चय छैक जे मैथिल समाज चेतना शून्य नहि त’ शून्यता केर स्थितिक एकदम लगीच छैक. मिथिलाक सामाजिक, सांस्कृतिक आ भाषायी चेतनाक रूप मे आजुक युवा केर भूमिका कें केंद्र क’ किछु सक्रिय मैथिल युवा सं बात केर क्रम मे उत्साह सं भरि गेल छलहुं.

सामाजिक काज मे रूचि रखनिहार प्रदीप कें जखन मिथिला मे युवाक भूमिकाक विषय मे पूछल त’ ओ बिहुँसि उठल फेर बाजल जे मिथिलाक युवा कें आइ बुझले नहि छैक जे मिथिला की छैक आ कतय छैक. शिक्षा केर माध्यम मैथिली हो त’ स्थिति सुधरत.

स्वरोजगार मे लागल नवल केर अनुसार मिथिलाक युवा कें अपन संस्कृति आ भाषा प्रेम एहू लेल दबल रहैत अछि, जे सभ कें बुझल छैक जे गाम छोड़हि पड़त, त’ किएक मोह रहत.

एहिना अनेक मैथिल युवा सं संवादक क्रम मे ज्ञात भेल जे मैथिल चेतना पर घरे सं चोट कयल जाइत अछि. बहुतो एहन पक्ष आ तर्क अछि जकर त्वरित समाधान संभव नहि अछि. तथापि एक आशाक इजोत देखल जे मैथिल युवा मे मिथिला/मैथिली प्रति मोह छैक. एकैसम शताब्दी मे मैथिलीक आठम अनुसूची मे दर्ज भेने सरकारी स्तर पर भने ने कोनो काज भेल हो, मुदा मैथिल केर सक्रियता बढ़ल अछि आ एहि सक्रियता मे युवा हस्तक्षेप सोन सन भविष्यक छाहीं देखबैत अछि.

साभार: मिथिमीडिया

‘जाहि लागी ताहि होअय’

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प्रदेश सरकार केर उदासीनता आ प्रशासनक अकर्मण्यता सं अकच्छ भ’ ग्रामीण युवक लोकनि अपनहि हाथमे कोदारि-छिट्टा ल’ सड़क पर माटि फ़ेकब शुरू क’ देलनि. मामिला बेनीपट्टी प्रखंड केर त्योंथागढ़ गामक अछि. लगभग दशक भरि पहिने बाढ़िमे ध्वस्त भेल कठपुलाक स्थान पर 2009मे सीएम सेतु योजनाक तहति पुलक निर्माण त’ भेल मुदा पुलकें सड़क सं बिनु कनेक्ट कएने ठीकेदार निपत्ता भ’ गेल. स्थानीय प्रतिनिधि लोकनि सं गोहारि क’ गामक लोक जखन थाकि गेल त’ स्वयं तैयार भेल अछि.

एहि पुल पर गोबरक ढेरी राखल रहैत छल. लगक बस्तीक महिला लोकनि एहि पर बेस कलाकारी सं गोरहा पथैत छलीह. गोरहा पाथय मे व्यस्त एक महिला सं जखन बात केलहुं त’ जवाब भेटल ‘उंचका स्थान हइ, सड़क बन्न हइ त’ किछुओ काज त’ होइ हइ. उंच रहने गोरहा नोकसानी नइ होइ हइ. सड़क चालू होतै त’ फेर देखबै कोन ज’ गोरहा पाथल होतै.’

ई सड़क बेस महत्वक अछि. एक दिस ई बासोपट्टी कें जोड़ैत अछि त’ दोसर बेनीपट्टी-उमगाँव कें जोड़यवला मुख्य सडक पर पहुँचबा हेतु एकमात्र बाट अछि दर्जनभरि गामक लेल. सभ सं नन्दी भौजी चौक जे आस-पासक सभ सं पैघ बाजार अछि, ओतय पहुंचयमे दू-तीन गामक लोक कें सेहो बेस दिक्कत होइ छै. एतबे नहि खिरहर सं मधुबनी यातायात हेतु बस सेवा सेहो एहि सं बेस प्रभावित भ’ गेल छैक.

सरपंच वशिष्ट झा मिथिमीडिया कें जनओलनि जे एहि पुल निर्माणक समयमे ठीकेदार टाका ठीक सं खर्च नै केलक. ओ आवाज उठओने छलाह आ अंततः एतेक बरखक बाद गामक लोकक प्रयास सं सड़कक काज शुरू भेल अछि. सरकार आ प्रशासन सं लोक दुखी अछि. मिथिला पलायनक दंश झेलि रहल अछि आ जे किछु लोक गाममे अछि से मूलभूत सुविधा लेल झखैए.

त्योंथाक मुंबई प्रवासी विजय राय कहैत छथि जे गामक युवक लोकनि बड़का उदाहरण प्रस्तुत केलनि अछि. कनेक तत्परता गामकें स्वर्ग बना सकैत अछि. हमरा सभ श्रम योग नहि क’ सकै छी मुदा प्रवासी ग्रामीण टाका पठा एहन सभ काज मे योगदान अवश्य करथि.

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सड़कक ई स्थिति तखन रहल अछि जखन सुशासन बाबू (नीतीश कुमार) दू बेर प्रदेशक मुख्यमंत्री बनल छलाह. ई मात्र एक गामक बात नै छै. मिथिलाक्षेत्र केर गाम-गाम केर यैह स्थिति छै. एकदिस हाइवे आ दोसर दिस जर्जरवे.

गामक दिल्ली प्रवासी सोनल राय अपन ख़ुशी व्यक्त करैत कहलनि अछि जे हम सभ बहुत दिन सं प्रयास करैत छलहुं आ जखन गाम सं ई समाद सुनल, हरखक ठेकान नै रहल. सत्ते आब हमरा सभकें अपनहि आगू आबय पडत. नेता आ अधिकारी लोकनिक भरोसे किछु ने होयत.

एहि काजक नेतृत्व कएनिहार युवक अमन झा चिंता व्यक्त करैत कहैत छथि जे एहि पूरा काज मे धनक आवश्यकता छैक आ ग्रामीण चंदा पर निर्भरता सेहो. हम सभ शुरू केलहुं अछि मुदा ग्रामीण लोकनि मदति करथि त’ सड़क चालू भ’ जेतैक.

त्योंथा गामक लोक उदाहरण प्रस्तुत केलक अछि. एहिना जओं गाम-गाम लोक जागि जाएत त’ सरकारक प्रति निर्भरता त’ कम होयबे करतैक आ तखन प्रतिनिधि लोकनिक निन्न फुजतैक. एहि समस्त उद्योग मे नरेंद्र राय, भवेश राय, श्याम झा, सोनू प्रकाश झा, गोविन्द झा, गोपाल झा, अभिषेक झा सहित ग्रामीण युवकक प्रयास प्रशंसनीय रहल अछि.

साभार: मिथिमीडिया

मैथिली लिटरेचर फेस्टीवल पर कलबल!

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एमकी पटना हमरा नीक लागल. टीशन पर उतरि जखने बाहर एलहुँ कि एकटा हवाइबस उपर सं गेल जे हमर धियान आकर्षित केलक. तखने हनुमान मंदिरक घंटाक स्वर कान मे पड़ल. चंदनजी दतमनि पकड़ओबैत कहलनि, आब बेसी समय हाथ मे नै अछि. स्नान आदि क’ सोझे सेशन ज्वाइन करय पड़त. ओ एतेक कहितथि कि बुद्धा पार्क लग सफइयति देखि आश्चर्य कि खुशी भ’ रहल छल से तय नै क’ पाबि रहल छलहुं. डेगा-डेगी दूरदर्शनक ठीक सामने यूथ हॉस्टल मे दाखिल भेलहुं. ता दतमनि भरकुस्सा भ’ गेल छल.

जेम्हरे नजरि जाए मैथिली एक्टिविस्ट, लेखक, कवि सभ देखबा मे आबथि. ओ जिनका सभ सं भेंट पत्र-पत्रिका मे होइ छल, से सभ साक्षात टहलैत, बुलैत, बतियाइत, खाइत देखबा मे अबथि. ई बस रोमांच जगा रहल छल कि चंदनजी नेने नेने एकटा कमरा मे ल’ गेलाह जतय एकटा खाट रिक्त छल. ओही पर दुनू गोटे झोड़ा-झंटी धेलहुँ. बगल केर खाट पर रामलोचन ठाकुर हमरा दुनू कें देखि मंद मुस्कान छोड़ि रहल छलाह. हुनका बगल मे बैसल विनोद कुमार झा हमरा दुनू कें आयोजन दिस सं रिसीव केलनि, स्वागत जनओलनि.

नहा-सुना क’ रेडी भेले छलहुं कि चंदनजी केर बजाहटि भेलनि, सत्र संचालन हेतु. एकर बादेबला सत्र हमर संयोजन मे मैथिली सोशल मीडिया पर छल. हुनके संगे हमहूं सभा स्थल पर पहुंचि ऑडियंस मे बैसि गेलहुं. एक एकटा ऑडियंस सेलिब्रिटी. खन मंच पर ताकी खन ऑडियंस मे बैसल सेलिब्रिटी लोकनि कें ठेकियाबी.

पहिल सत्र समापनक बाद अल्पविराम आ फेर सोशल मीडिया पर सत्र. कलकत्ता मे रहैत कतिपय साहित्यिक कार्यक्रम होस्ट करैत रहलहुं अछि से रेहल-खेहल छल. आ विषय सेहो भोगल-जीयल छल त’ कोनो तेहन दिक्कत नै भेल. सत्र संचालन सं किछु काल पहिने हमर उमेर वा धुआ देखि संचालक मे सं एकटा नीक लोक हमरा बजा निजगुत केलनि जे हम क’ सकब कि नै. तकर बादे मंच पर गेल छलहुं.

सत्र समापनक बाद उपस्थित बुद्धिजीवी लोकनिक रिस्पांस हमरा आश्वस्त केलक जे सत्र अपेक्षा सं बेस नीक रहल. किछु गोटे कहथि, नीक तैयारी क’ क’ आएल छलहुं. कहनिहार मे सं बेसी लोक यएह कहलनि. असहजो लागि रहल छल आ सभ कें जवाबो देब संभव नै. हम मुसकिया देइत छलहुं. नीक लागल जे लोक खोजि-खोजि क’ चाबस्सी देइत रहलाह आ ई सिलसिला दिनभरि चलल.

बिहार-पटना मे तैयारी बहुत बड़का फैक्टर होइ छै. भोज-भातक तैयारी, परीक्षाक तैयारी, इलेक्शनक तैयारी, मेला देखबा जाए लेल तैयारी, ई तैयारी, ओ तैयारी मने बिनु तैयारीक किछु संभव नै छै. तहिना आयोजनक तैयारी सेहो नीक आ व्यवस्थित रूप मे छल. जखन पॉजिटिव सोचक संग आगू बढ़बै त’ बहुत किछु नीक होइ छै जे तैयारीमुक्त रहै छै. ई जरूरी नै छै जे जे किछु नीक घटित भेल अछि, ओहि मे तैयारी सन्हियाएल छै. बहुत किछु स्वाभाविक आ बिनु तैयारीक सेहो होइ छै. बस इंटेशन नीक हो, सोच पॉजिटिव हो.

पॉजिटिव सोचक संग पटनाक मैथिली साहित्यमेला उभरि क’ आएल अछि आ एखन धरिक मात्र दू संस्करण मे नीक प्रभाव छोड़बा मे सफल रहल अछि. साहित्य मेलाक आयोजक सभ बेस अनुभवी लोक सभ छथि, वरिष्ठ लोक सभ छथि. पूरा कार्यक्रम तेना ने सजाओल रहैछ जेना साहित्यपुष्प केर कसगर गूँथल माला हो. साहित्यिक लोकनिक संगहि संग बुक स्टॉल, मिथिला पेंटिंगक स्टॉल सभ लगओनिहार लोकनि सभ सं सेहो गप्प भेल. मेला कें ल’ ओ सभ सेहो संतुष्ट लगैत छलाह आ एकरा एक अवसर जानि प्रसन्न छलाह. बिक्रीक जे गति रहल हो, मेला सं सभ उमंग मे बुझाएल.

ई मेला एहि तरह कोनो आन मेला सं नीक अछि. उद्देश्य आ स्वरूप वैश्विक इवेंट केर छै. मैथिली मे एहन आयोजन सं साहित्यिक समुदाय आ मिथिला समाजक गौरव बढ़ल अछि. आवश्यकता छै एकरा जारी रखबाक, एकरा उन्नति पथ पर ल’ जेबाक. आयोजक मैथिली लेखक संघ अछि आ आयोजन साहित्य पर अछि त’ एकर स्वरूप आ संचालन उत्तम छै. किछु प्रबंधकीय बिंदु पर आयोजक लोकनि कें धियान देब आवश्यक छनि, जे एहि कार्यक्रम कें आगूक भविष्य तय करत.

आमलोकक भागीदारी:
कार्यक्रम साहित्य मेला छै, तैं साहित्यकारेटा जुटथि जरूरी नै. जाबे आम लोक जुड़त नै, भीड़ नै होएत. भीड़ नै होएत त’ मेलाक पेंटिंग प्रदर्शनी, बुक स्टॉल आदि व्यवसाय नै क’ सकत आ एहना मे लेखक-प्रकाशक, कलाकार केर रुचि घटत. मैथिली मे साहित्य साहित्यकारे मध्य घुरिया रहल अछि. लोक कें जोड़ब आवश्यक, सम्भवतः ई मेलाक मूल उद्देश्य अछि. लोक कोना जुटत एहि पर सोचब जरूरी.

युवाक सोझ भागीदारी:
पटना मे लगभग दर्जन भरि युवा साहित्य लेखन मे सक्रिय छथि. मुदा किनको सोझ भागीदारी नै बुझाएल. वरिष्ठ लोक सभ काउंटर सभ पर बैसल भेटलाह। एक-आध कें छोड़ि स्थानीय युवा साहित्यिक लोकनि उपस्थिति देबा लेल आएल छलाह. नवतुरियाक सही उपयोग करब आवश्यक छै. एही मे सं काल्हि भेने केओ मेला आयोजन मे महत्वपूर्ण भूमिका निमाहि सकैत अछि. आयोजनक भविष्य कें देखैत ई अत्यन्त आवश्यक बुझना गेल.

मीडिया प्रबंधन:
कार्यक्रम राजधानी क्षेत्र मे आयोजित होइए आ ई राज्य लेल सेहो महत्वपूर्ण भ’ जाइ छै. मीडिया कें समाद देनिहार कोनो चिन्हित लोक आ केंद्र होएबाक चाही. बहुत लोक कैमरा देखि अपन राग गबैत देखल गेलाह. भोरे अखबार सभ सेहो अनजान-सुनजान समाद छपइए जकर मुंह आ पेनी ताकब संभव नै लगैछ.

वित्तीय प्रबंध:
एकटा विराट खर्चाबला कार्यक्रम अछि ई. आयोजक लोकनि कें वित्तीय व्यवस्था केना होइ छनि ताहि तह मे नै जा एतेक कहब जे चंदा जओं कोनो सरकारी-गैर सरकारी वैध स्रोत सं अबैत अछि त’ सहज स्वीकार करबाक चाही. सत्र-सत्र केर प्रायोजक, बैनर, होर्डिंग, कैम्पस सभ ठामक व्यवस्था कॉर्पोरेट केर स्पांसरशिप मे हेबाक चाही. लेखक संघ कें सदस्य आ सदस्यता पर धियान द’ कोष एकत्र करबाक चाही. एकटा सालभरि काज केनिहार वित्तीय टीम चाही जे एकर वित्तीय पक्ष पर काज करत. मौसमी रूपेँ सक्रिय भेने काज नै चलत. वित्त कार्यक्रमक धूरी होइ छै.

मैथिली लेखक संघ कें अपना मे सेहो सुधार क’ साहित्य मेलाक चिरजीविता लेल काज शुरू करबाक चाही. वर्तमान मे एहन प्रतिभा आ प्रभावी लोक सभ छथि जे मेला लेल समर्पित छथि मुदा व्यवस्था व्यक्ति आधारित नै हो ताहि दिशा मे काज हेबाक चाही. जय मैथिली!

साभार: मिथिमीडिया

‘हुनका संग मन मैलोरंग’

ई संसार रंगमंच छै आ इश्वर एकर डाइरेक्टर छथि. एहन कहल जाइछ. ई बात तेना ने मोनमे बैसि गेल अछि जे निर्देशक फिल्मक हो वा रंगमंचक, ओकरामे इश्वरीय तत्व ताकए लगैत छी. संघर्षक चरमपर सफलताक बास छै आ से वएह चरमपर पहुंचि सकैत अछि जकरामे ओ इश्वरीय अंश हो आ से जागृत रूपमे. एहन व्यक्ति सभसं भेंटक’ अलगे संतोख भेटैत अछि. किछु दिवस पहिने एहिना रंगमंचक लोकप्रिय निर्देशक प्रकाश झा सं भेंट कएल. ओ कलकत्ता आएल छलाह कोनो व्यक्तिगत यात्रापर. विगत बेरक हुनक कोलकाता आगमनपर भेंट करबाक तत्परता छल मुदा संजोग जे ओ हावड़ा टीशनपर राजधानीमे बैसल बाट तकैत रहलाह आ हम ट्रैफिकमे फंसल रहि गेलहुं आ राजधानी दिल्ली दिसक’ हुनका नेने गेल. भेंट नै भेल. तैं एहि बेर हम हुनकासं भेंट करबाक अवसर गरगोटिक’ रखलहुं. भेंट केलहुं.

किशोरवयसं प्रकाश झा आ मैलोरंग केर नाओ सुनैत आबि रहल छी. मधुबनीसं नोकरीक आसमे दिल्ली पहुंचल ओ युवक अविश्वसनीय रूपसं मैथिली रंगमंचकें सफलताक चरमपर ल’ गेल आ पानिपर रेघा घिचि ओकरा स्थायी बना देलक. मैलोरंग आइ परिचयकें मोहताज नै छै. प्रकाश झा सं गप्पक’ मोन मैलोरंग भ’ गेल.

प्रकाश झा जेना अपनत्वसं हमरा रिसीव केलनि आ निश्चिंततासं गप्प केलनि से बेस प्रभावित केलक. मैथिल सेलिब्रिटीमे एहि बातक पूरा अभाव देखल जाइछ. तखन एकैसम सदीक सेलिब्रिटी बेसी उदार आ सोझराएल प्रवृतिक छथि, एहि बातक पुष्टि सेहो भेल. हमरा कनियो काल लेल नै लागल ई हुनकासं पहिल भेंट अछि.

हमर छवि मीडियायुक्त अछि आ तैं लोक बेस चौपेतल गप्प करैत छथि जे कतहु किछु ई लिखि सकैत अछि. कतेको लोककें अपन छवि मेनटेन करबाक चिंता सेहो घेरने रहैत छनि. प्रकाश झा हमरा एहि सभसं बहुत-बहुत फटकी लगलाह. ई हुनका आओर विशेष बना देइत छनि. मधुबनीमे टटके संपन्न भेल ‘मिथिला रंग महोत्सव’ पर बात करैत प्रकाश कहैत छथि जे हमरा नीक टीम भेटल अछि जे मधुबनीमे नाटक करबाक साहस कएल. परिस्थिति विषम छै, तथापि गाम-गाम आब नाटक समाप्त भेल जा रहल अछि. यएह चिंता हमरा दिल्लीसं मधुबनी ल’ गेल. ओतय हम फेल भेलहुं अछि. अपेक्षाक अनुरूप नै भेल. मुदा फेर करब. मिथिलामे गाम-गाम नाटक होइ छलैक जे आब बन्न सन भेल जा रहल छै.

ओ कहैत छथि जे नाटकमे नीक करियर छै. युवासभकें नाटक खेलबाक चाही, नाटक पढबाक चाही. संतोखक गप्प जे लोक नाटक लेल काज करबा लेल आबि रहल छथि. दिल्लीमे पहिनो नाटक होइ छल मुदा मुख्य केंद्र सभपर नै. एखन मैथिली नाटक लेल मैलोरंग सहित आओरो संस्था सभ सालमे कएकटा नाटक खेलाइत अछि. आब नाटककें गाम दिस ल’ जेबाक बेर छै. एक बेर नाटक गाम-गाम शुरू हेबाक चाही. तखने नाटक बांचल रहतैक. आइ हमहूँ गाममे नाटक करैत छलहुं आ तखन आगू नाटक करैत रहलहुं. लोक ओत्तहिसं अओतैक.

प्रकाश अपन संघर्षक दिन मोन पाडैत कहैत छथि, शुरूमे हमरा नाटक लेल एकटा छात्रवृति भेटल. नाटक खेलबाक लेल दरमाहा भेटब अजगुत लागल छल आ ओतहिसं भेल जे नाटकमे रमि जाइ. एहूमे करियर छै आ संभावना असीमित छै. तखन हमरा पथप्रदर्शक लोकनि सेहो भेटलाह आ सहयोगी लोकनि सेहो जे लगातार नाटक लेल काज करब संभव भेल.

प्रकाश मैलोरंगक कलाकार सभक नाओ लेइत कहैत छथि जे सभ तरहक प्रतिभासं भरल टीम अछि. एकपर एक कलाकार आ सभसं विशेष बात जे ओहि कलकार सभमे अभिनयक प्रति समर्पण अद्भुत छै. एही बलपर मैलोरंग एहन नाट्यदल बनि सकल जे 5टा अलग-अलग नाटक लगातार  क’ सकैत अछि. देशमे नै छै एहन कोनो नाट्यदल जकरामे ई सामर्थ्य हो. ई उपलब्धिसं कम नै अछि हमरा लेल.

प्रकाश दिवंगत साहित्यकार-कलाकार कुमार शैलेन्द्रकें मोन पाडैत कहैत छथि जे ओहन प्रेरक लोक छलाह हमरा सभक मध्य जे बहुतो काज कएल संभव भ’ सकल. हुनका सहयोग आ प्रेरणा हमरा सभकें आगू अनलक अछि. ओहन लोक भेटब मोसकिल. मलंगिया नाट्य महोत्सवक प्रेरणा वएह देलनि. महोत्सवक सफलताक क्रेडिट ओ टीम वर्ककें देइत कहैत छथि जे अहां जे कोनो काज मोन द’ करबैक त’ सफल हेबे करतैक.

प्रकाश कहैत छथि जे हम एहन तुर्क ठाढ़ करबाक इच्छा रखैत जे नाटकक भविष्य लेल हमरा निश्चिन्तक’ सकैत अछि. भने एखन नाटकमे आबएकाल मोन छओ-पांच होइत हो लोकक मुदा ई काल्हि केर नीक करियर विकल्प हेतैक.

प्रकाश झा नाटक करैत पनरह बरखसं बेसी समयसं सक्रीय छथि. एक मोकामपर छथि मुदा एखनो हुनकामे नाटक लेल काज करबाक भूख हमरा बेस आश्वस्त क’ गेल. ओ सकारात्मकता, ओ सिनेह, ओ एनर्जी कहां भेटैत अछि सभतरि. प्रकाश झासं मैलोरंग आ मैथिली नाटक सहित विभिन्न मिथिला-मैथिली बिंदुपर गप्प भेल आ बहुत रास गप्प समयाभावक बलि चढ़ल. एहि आसमे जे फेर भेटब.

साभार: मिथिमीडिया

उन्मुक्त आयोजनक नबका ट्रेंड ‘अकासतर बैसकी’

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बैसकी किएक?
मिथिला सं ल’ परदेस धरि मैथिली भाषा-साहित्य सं जुड़ल अनेको गोष्ठी आयोजित होइत रहैत अछि. एहन गोष्ठी कोनो ने कोनो संस्थाक छाहरि मे होइत रहल अछि. एकर अतिरिक्त सरकारी-गैरसरकारी साहित्यिक अनुष्ठान शीतताप नियंत्रित सभा कक्ष मे होइए. मने मैथिली मे बहुत बेसी साहित्यिक कार्यक्रम होइत रहल अछि.

एहि सभ कार्यक्रम मे आम लोकक भागीदारी नै जकां रहैत छै संगहि साहित्यिक लोकनिक उपस्थिति सेहो ओतेक नीक नै रहैछ. एहन अवस्था मे भाषा-साहित्य सं जुड़ल कार्यक्रम आम लोकक पहुंच सं बाहर भ’ गेल अछि. परिणाम भेल जे ने साहित्यप्रेमी रहल आ ने आम लोकक मध्य सं रचनाकारे बहराइछ. नब लोक जे साहित्य लेखन दिस रुखि करितो छथि, प्लेटफ़ॉर्म आ प्रोत्साहनक अभाव मे उभरि नै पबै छथि.  साहित्य एकटा सर्किल मध्य संकुचित भेल गेल अछि. एकर बड्ड भयाओन परिणाम सं मैथिली भाषा गुजरि रहल अछि.

एही सभ बात कें धियान मे रखैत कलकत्ताक किछु भाषाप्रेमी लोकनि ‘अकासतर’ साहित्यिक गोष्ठी करबाक नियार सं अनौपचारिक गोष्ठी शुरू केलनि, जे ‘अकासतर बैसकी’ नामे जानल जाइए. गोष्ठी मे पुरान आ स्थापित रचनाकारक स्थान पर नवतुरिया वा नब आगंतुक कवि कें प्राथमिकता देल जाइत अछि. सभ सं विशेष बात जे एहि मे कवि आ कविता प्रेमी संग बैसि क’ कविताक आनंद लेइत छथि. एकर आयोजन फुजल अकासतर कोनो पार्क, मैदान, स्कूल-कॉलेज वा कोनो संस्थानक कैम्पस आदि स्थान पर होइए. धियान राखल जाइए जे आयोजन मे कोनो तरहक लम्फ-लम्फा नै हो.

कवितेटा किएक?
ई गोष्ठी मैथिली कविता कें समर्पित अछि. एहि मे पद्य विधाक साहित्य पढ़ल-सुनल जाइए. ओहि पर विचार, विमर्श ओ समीक्षा प्रस्तुत कएल जाइए. काव्य विधाक रचना कम समय मे पढ़ल जा सकैए आ एक गोष्ठी (जे डेढ़-दू घंटाक होइए) मे बहुते गोटे अपन रचना राखि सकैत छथि. मैथिली भाषा सं आमजन कें जोड़बाक लेल ई गोष्ठी शुरू कएल गेल अछि. कविते एहन विधा अछि जे नवतुरिया सं ल’ वरिष्ठ लोकनि धरि कें अपना दिस आकर्षित क’ सकैछ. एकर वाचन, गायन, प्रस्तुतीकरण अलग-अलग ढंग सं कत्तहु कएल जा सकैछ.

साहित्यिक गोष्ठी जाहि मे सभ विधा पढ़ल-सुनल जाए, पहिने सं होइत रहल अछि. कलकत्ता मे लगभग अढाइ दशक सं ओ जमशेदपुर मे एक दशक सं ‘संपर्क’ नामे एहन गोष्ठी आयोजित होइत रहल अछि. कथा गोष्ठी ‘सगर राति दीप जरय’ बेस लोकप्रिय भेल अछि त’ अनेक साहित्यिक गोष्ठी अस्तित्व मे अछि जे समय-समय पर विभिन्न ठाम विभिन्न संस्था सभ द्वारा आयोजित होइए. मुदा कविता कें समर्पित गोष्ठीक नितांत खगता देखल जा रहल छल. एही सभ कारणें ‘अकासतर बैसकी’ कविता केन्द्रित राखल गेल.

कोना होइए संचालन?
एकर संचालन पूरा रूप सं संयोजकक जिम्मे रहैत छनि जे एक साल लेल मनोनीत रहै छथि. गोष्ठीक पहिल साल 2015क संयोजक रूपेश त्योंथ भेल छथि जे साल 2016 लेल संयोजकक दायित्व चन्दन कुमार झा कें सौंपलनि. 2017 लेल संयोजनक भार भास्करानंद झा भास्कर कें देल गेलनि अछि. संयोजकक मनोनयन आपसी सहमति आ विचार-विमर्श सं कएल जाइछ. बैसकी पर नजरि रखबाक लेल 5 सदस्यीय एडवाइजरी बोर्ड अछि जे एकर स्वरूप, उद्देश्य केर समीक्षा करैत अछि आ संयोजकक क्रियाकलाप आ प्रयास पर दृष्टि रखैत अछि. एडवाइजरी बोर्ड मे राजीव रंजन मिश्र, भास्करानंद झा भास्कर, मनोज शाण्डिल्य, चन्दन कुमार झा ओ रूपेश त्योंथ छथि. एक बेर संयोजक सं सहमति ल’ बैसकी देश-विदेश मे कतहु आयोजित कएल जा सकैत अछि. संयोजकक अनुपस्थिति मे आयोजित बैसकीक वैधता पर संयोजक आ एडवाइजरी बोर्ड मिलि क’ निर्णय करैत छथि. बैसकीक उतरोत्तर विकास ओ प्रसार सहित आयोजनक स्वरूप पर बैसकी मे उपस्थित लोकनि सभ सं समय-समय पर सलाह-मशविरा कएल जाइत अछि.

की कएदा-क़ानून?
बैसकीक सभ सं बड़का कएदा कविते अछि. कविते पढ़ब, कविते सुनब, कविते जियब, कविते भोगब. कविता पर सभ किछु भ’ सकैए. भाखा मैथिलीएटा होएत, तखन आन-आन भाखाक उत्तम कविताक मैथिली अनुवाद पढ़ल-सुनल जा सकैत अछि. गोष्ठी मे उपस्थित लोकनि आन रचनाकारक रचना सेहो पढि सकैत छथि. कविता प्रकाशित-अप्रकाशित वा नव-पुरान सभ तरहक रहि सकैत अछि. ओहि पर चर्च-विमर्श भ’ सकैत अछि. रचना पर त्वरित टिप्पणीक विधान नै अछि. रचना पढ़ब-सुनब आ तकर आनंद लेब, नव रचनाकार कें प्रोत्साहित करब मुख्य ध्येय राखल गेल अछि. कोनो वैध बैसकी मे 5 गोटेक उपस्थिति अनिवार्य अछि. साल मे कम सं कम 5टा गोष्ठी होएब आवश्यक अछि. बेसी सं बेसी 12टा बैसकी भ’ सकैत अछि.

ट्रेंड बनल बैसकी!
अकासतर बैसकी शुरू भेल कि लोकक धियान एहि दिस गेलै. ओना त’ मिथिला मे पर-पंचैती सं भोज-भात सभ फुजल अकासतर होइत रहल अछि मुदा आधुनिकताक बिर्रो मे साहित्यिक बैसकी कहिया ने उधिया गेल. गाम मे त’ ई कार्यक्रम सभ नहिए होइए, शहर मे होइए मुदा से शहरी बात-बेवस्था मे. महानगरक साहित्य-प्रेमी फुजल अकासतर नीचा मे बैसि क’ कविता पढैत छथि, चर्च-विमर्श करैत छथि से देखि लोक आकर्षित भेल. बैसकी सं जुड़ल एकटा एहने बैसकी राजधानी दिल्ली मे आयोजित भेल आ फेर एक सिलसिला शुरू भ’ गेलैक. पटना-दरभंगा, मधुबनी, जनकपुर के’ कहय, दोहा -कतार धरि अकासतर साहित्यिक आयोजन सभ भेल आ भ’ रहल अछि. ‘अकासतर बैसकी’ बहुत कम समयमे आयोजनक एकटा ट्रेंड स्थापित करबा मे सफल रहल अछि. ई धारावाहिक गोष्ठी आयोजनक तेसर साल मे अछि. समस्त भाषा-साहित्यप्रेमी कें हार्दिक बधाइ!

साभार: मिथिमीडिया

‘अहां मैथिल छी, मैथिली बजै छी की?’

शीर्षक पढि कने उटपटांग लागल होयत. मोने सोचैत होयब जे लगभग पांच कोटि लोकक ठोर पर जाहि अमिट, अतिपावन भाषाक राज अछि, जे भाषा भारतक संगहि नेपाल मे सेहो विशेष प्रतिष्ठित अछि, जे भाषा अपन विशाल आ अमूल्य साहित्यनिधिक बल पर भारतीय संविधानक आठम अनुसूची मे विराजमान अछि, जे भाषा जनकसुता जानकीक कंठ-स्वर सं निकलल अछि, ताहि भाषा पर कोन संकट आबि गेल?

वा फेर सोचैत होयब जे हम बताह त’ नहि भ’ गेलहुं अछि? नाना प्रकारक सोच दिमागी समुद्र मे हिलकोर मारैत होयत. जं से सत्ते, त’ अपन सोच कें कने स्थिर करी. असल मे ई प्रश्न आइ-काल्हि पद्मश्री उदित नारायण (झा) क’ रहल छथि, सेहो पूरा तामझामक संग.

मायक भाषा संग मोह जिनगी भरि बनल रहैत छैक. चाहे कतेको स्वार्थंधता वा दंभता केर गर्दा मोन-मस्तिष्क मे हो मुदा जखन भावनाक प्रबल प्रवाह होइत छैक त’ लोक कें मोन पड़ैत छैक माय, मातृभाषा आ मातृभूमि. ओ प्रत्येक वस्तु जाहि मे मातृअंश हो, एक-एक क’ मोन पड़य लगैत छैक.

मैथिली मे गायन शुरू क’ आइ सफलताक उच्चतम शिखर पर पहुंचल उदित नारायण कें कोनो एक भाषाक गायक नहि कहल जा सकैत अछि. भारतक अनेको भाषा मे ओ एक संग गबैत आबि रहल छथि.

कोनो सफल व्यक्तिक संग विवाद ओहिना लागल रहैत छैक जेना नवकनियाक संग लोकनिया. उदित नारायण सेहो एकर अपवाद नहि छथि. खैर जे हो, ओ सच्चा मैथिल छथि आ मैथिलीक प्रेमी छथि. पद्मश्री हेतु चयनित होयबा काल हुनक नागरिकता हेतु विवाद उठल छल. कतेको लोकनिक कहब छलनि जे ओ नेपालक छथि. मुदा जे हो, ओ मैथिल छथि चाहे नेपालक मिथिलाक होथि वा भारतक मिथिलाक. ओना सभ विवाद कें एकात करैत भारत सरकार हुनका पद्मश्री सं सम्मानित कयलक. मिथिलाक लेल इहो गौरवक बात.

आब अहाँ सोचैत होयब जे हम ‘उदितायण’ केर पाठ किएक क’ रहल छी? असल मे, पुरहित कोनो आध्यात्मिक अनुष्ठान शुरू करयबा सं पहिने संकल्प करा लैत छैक, त’ एखन धरि हम सैह क’ रहल छलहुं. मुद्दाक बात आब.

पड़ोसियाक घर मे हुलकी देबाक बेमारी सं के’ ग्रसित नहि अछि? से भोजपुरी टीवी चैनेल मे हुलकी-बुलकी देइत रहैत छी. कतहु , कखनो मैथिली सुनबा-देखबा लेल भेटि गेल त’ नयन तिरपित भ’ गेल. से साल भरि सं बेसिए समय सं भोजपुरी टीवी चैनेल महुआ लोकक मनोरंजन क’ रहल अछि. एही पर एकटा संगीत आधारित कार्यक्रम आबि रहल छल- सुर-संग्राम. लोकगीतक श्रोता लेल बहुत नीक कार्यक्रम छल ओ. एहि रियलिटी शो मे मैथिली भाषी प्रतिभागी सभ सेहो छलाह. जेना पूजा झा (दरभंगा), रिमझिम पाठक (धनबाद), आलोक कुमार (खगड़िया). आलोक कुमार, मोहन राठौर (यूपी)क संगहि विजेता रहलाह. एहि शो मे तीन बेर उदित नारायण अतिथि जज बनि क’ आयल छलाह.

पहिल बेर जे जज बनि क’ अयलाह त’ प्रतियोगी प्रियंका सिंह (गोपालगंज) केर माय, जे ओहि दिन स्टूडियो मे उपस्थित रहथि, सं पूछि देलथिन जे मैथिली-उथली बजै छी की? असल मे हुनका ज्ञात नहि रहनि जे प्रियंका सिंह गोपालगंज सं छथि. उदित नारायण कें प्रियंकाक मायक पहिरावा देखि मिथिलानी होयबाक भ्रम भेल रहनि.

दोसर बेर मे ओ प्रतियोगी रिमझिम पाठकक उपनाम ‘पाठक’ देखि पूछि देलथिन- अहाँ मैथिली बजै छी की? रिमझिम लजाइत बजलीह- हं, थोड-बहुत. तकर बाद उदित नारायण हुनक गायिकी पर मैथिली मे कमेन्ट देलनि. एहि बात सं ई सिद्ध भेल जे हुनका ह्रदय मे मैथिलीक प्रति प्रगाढ़ प्रेम छनि. कारण, भोजपुरीक टीवी चैनेल पर मैथिली बजबाक हुनक छटपटाहटि सहजे देखल गेल. मुदा मैथिली के प्रोमोट करबाक लेल की कयलनि, आ की क’ रहलाह अछि, से बेसी महत्वपूर्ण.

सक्षमे दिस संसार अपेक्षाक दृष्टि सं तकैत छैक. मैथिलीक अउनाहटि एही सं पता लगाओल जा सकैत अछि जे मैथिली अपना संसार मे जतेक हाथ-पयर मारबा मे सक्षम अछि, मारिये रहल अछि संगहि आन-आन भाषा-क्षेत्रक प्रिंट-इलेक्ट्रोनिक मीडिया मे सेहो घुसपैठ क’ रहल अछि. जेना हिन्दी चैनेलक धारावाहिक सभ मे मैथिली गीत ओ संवाद सुनबा-देखबा मे आबि जाइत अछि त’ भोजपुरी चैनेल महुआ पर त’ कतेको चिन्हार मैथिली कलाकार रोजगाररत छथि त’ एही चैनेल पर कहियो-काल मैथिली गीत-सिनेमा देखबा लेल सेहो भेटि जाइत अछि.

आब प्रश्न उठैत अछि जे आख़िर कहिया धरि घुसपैठे स’ काज चलबैत रहब? समाचार पत्र, टीवी चैनल, सिनेमाक क्षेत्र मे ठोस काजक नितांत आवश्यकता अछि. कारण एहि सं भाषाक प्रसार व्यापक रूपे होइत छैक. मैथिली घेंट उठौलक अछि. कोलकाता सं मैथिली दैनिक पत्र (मिथिला समाद) आ दिल्ली सं टीवी चैनेल (सौभाग्य मिथिला) शुरू भेल अछि. एहि दुनूक आगां अपन प्रसार व्यापक करबाक चुनौती छैक. मिथिला क्षेत्रक लोक माछ खा शरीरे बलिष्ट आ दिमागे तेज होइत अछि त’ पान खा स्वरक प्रखरता सेहो बनल रहैत छैक. संगहि एहि क्षेत्रक लोक मे मखान सं सादगी सेहो देखबा मे अबैछ.

मैथिलीक चर्चा अबिते विद्यापतिक छवि दृष्टि पटल पर नाचय लगैछ. विद्यापति मैथिलीक प्राण छथि, ताहि मे कोनो दू मति नहि. मुदा हमरा लोकनि कहिया धरि विद्यापतिये सं काज चलबैत रहब? हमरा लोकनि के गोसाओनिक घर सं निकलि बाहरोक बसात लगयबाक चाही. आधुनिक युगक मांगक अनुरूप अनुकूलित होयब आवश्यक.

एकैसम शताब्दी मे मिथिलाक कराह-स्वर दरभंगा होइत सोझे दिल्ली पहुँचि रहल अछि त’ मैथिलीक छटपटाहटि सहजहि अनुभव कयल जा सकैत अछि. आशा अछि मैथिल एहि बात के बुझैत अपन माय, मातृभूमि आ मातृभाषाक मान बढ़यबाक प्रबल प्रयत्न करताह.

हमरा लोकनि कें संयुक्त प्रयास सं एहन मिथिलाक सृजन करबाक अछि, जकर गमक सं वातावरण गमगमा जाय, जकरा देखने नयन तिरपित भ’ जाय आ जकरा सुनने कर्णपटल धन्य भ’ जाय. हमरा लोकनि कें एहन बसात बहयबाक अछि, जकर अनुभव मात्र सं ओकर पहिचान कयल जा सकय. हमरा लोकनि कें एहन परिवर्तन अनबाक अछि जाहि सं कम सं कम मैथिल मैथिल कें चिन्हबा मे धोखा नहि खा सकथि. हमरा एहन मिथिला बनेबाक अछि जाहि सं कोनो उदित नारायण के ई नहि पूछय पड़नि जे ‘अहाँ मैथिली बजै छी की ?’

(साल 2009 मे मैथिली दैनिक ‘मिथिला समाद’ लेल लिखल आलेख)

साभार: मिथिमीडिया